Monday, January 18, 2010

रिश्ते जो

       रिश्ते जो

झूठ की बुनियाद

पर टिके हो

उनका विच्छेदित होना

ही बेहतर है|

संबंध जो

स्वार्थ के धरातल पर

बने हो

उनका खत्म होना ही

लाजिमी है

ऊची अट्टालिकाये

जिनकी नीव 

पुख्ता न हो

उनका भरभराकर गिरना

सुनिशिचित है

छद्मवेष धारी

दोगले व्यक्तित्वो 

की भीड़

से बेहतर है

अकेलापन 

और 

सत्य की शक्ति

Sunday, January 17, 2010

भाव

भक्त और भगवान का
 मध्यस्थ बस इक भाव है
भाव के भूखे प्रभूजी
भाव ही इक सार है|
अन्न,धन और स्वर्ण
होते सभी बेकार है
आप हो जाए प्रभू के
इक यही सत्कारहै|
भाव बिन सूनी पुकारे
देवता सुनते नहीं
भाव बाले भक्त ही
करते उन्हें लाचार है|
भाव बिन हीरा भी देदो
तो भी वे लेते नहीं
भाव का इक फूल भी 
कर लेते वे स्वीकार है|
आगया जो शरण में
करते प्रभू उद्धार है
भक्त और भगवान का
भाव ही से तार है|
भाव यदि रखते नहीं
चिंता तेरी बेकार है
भाव बाले भक्त का
भरपूर उस पर भार है|
भाव की जंजीर से
बांध लेते भक्त ही
इसलिए इस भूमि पर
लेते प्रभू अवतार है|

शब्द

शब्द एक शब्द नहीं
शब्द निराकार है
शब्द सभल कर बोलिए 
शब्द महिमा अपार है|
शब्द ही औषध बना
शब्द से होते घाब
शब्द के दिखते नहीं
मुख, हाथ और पाव|
जो निकल जाता है मुख से
शब्द वापिस आता नहीं
दिल किसी का तोड के
चैन तू पाता नहीं|
शब्द पर रखता ध्यान तू
पा जाता सबका प्यार
मौन मुख काऔर मन का
कर देता भाव से पार|
मौन ही है देवता
मौन ही भगवान है
ज्ञानी को हर दम सदा
मौन का बस ध्यान है|
कुछ न कह कर भी 
बहुत कुछा मौन ने कहा
इसलिए कहते गुरुजी
शब्द ही विद्वान है|
सत्य बोलो प्रिय भी बोलो
कड़वा सच भाता नहीं
सर्व धर्म कहते यही
शब्द मीठा महान है|

Wednesday, January 6, 2010

दो बाल गीत

              १   

 बिल्लो बाई-बिल्लो बाई

हम तुमको दे दूध मलाई

चूहे पकड़-पकड़कर लाना 

और हमें सब देती जाना

हम उनसे खेलेगें खेल

आपस में रखेगे  मेल |

            २

 ओहो आया भालू काला

लंबे-लंबे बालों  बाला

आये लडके मोहल्ले भर के

खड़े हुए सब घेरा कर के

लिए मदारी था जो झोला

धरती पर रख उसको बोला

नाच दिखादे अपना भालू

पायेगा  तू  रोटी   आलू

और बजाया डमरू दमदम

लगा नाचने भालू छम-छम

फिर भालू  ने गाना  गाया

उछल-उछल कर नाच दिखाया

नाचो   भालू    ऐसे-ऐसे

बच्चे तुमको देगें पैसे

लगे बरसने पैसे खन-खन

उन्हें जेब में रखकर फ़ौरन 

हँसता आगे बड़ा  मदारी

भीड़ लिए बच्चों की भारी|

उन्हें

Tuesday, January 5, 2010

तीन बाल गीत

चंदामामा आजा आजा

आसमान का हाल बताजा

तुझे बनाऊंगा मैं राजा|

चम्पा, चुन्नी और चमेली

देख के तेरी छवि अलबेली

खुशा हो खूब बजाती ताली

आहा कैसी छटा निराली|

                २

           हुआ सबेरा मुर्गा बोला

         घर से चला टहलने भोला

         मिला राह में उसको भालू

         लगा माँगने रोटी आलू

         टूटी खाट गिर गया भालू

        अब न चाहिए रोटी आलू|

                      ३ 

     देखो एक मदारी आया

   साथ  तुमरी झोला लाया

    झोले में साँप निकाला

     वह था बिलकुल काला_काला

     लगा तुमरी वह बजाने

   साँप लगा तब नाच दिखाने

   अपना करतब खूब दिखाया

    सबने उसको दूध पिलाया

    बीन बजाता वह जाता था

   बच्चो^का मन बहलाता था |

ऐसा भी होता है।

थम   रही   है  साँसें  ,रूक       रहे           कदम है।

सब कुछ है गडमड होता,दिखता भी अब तो कम है। 

तार    हैं  अब    निश्चल   , वीणा  भी  सो  गई  है   ।

कितने  कदम की दूरी, तुझसे शे ष रह गई      है।

स्वर्गिक   सुख  की   छाया  , छू भर   गई     थी  ।

वेदना    की   लहरें    भिगो- भिगो    गई       है   ।

हर पल    तुझे     पुकारा,  कहीं  भूल  रह  गई  है।     

तेरी     कृपा    भी  ईश्वर , मरीचिका बन  गई है।     

अपनी  दया  की दृ ष्टि ,कर  दो मेरे  अब  ऊपर ।

बहुत  सह   लिया  है,    शक्ति     नहीं    बची  है।  

Sunday, January 3, 2010

जैसी हरि इच्छा

सब बातों का अंत यही है

मानव कीसीमा यहीहै

कर सकते थे हम जो उपाय 

कर बैठेथक हार भी बैठे

 हो गये अब निरुपाय

अब जो अच्छा होगा

यही सोच हम चुप हो बैठे

भगवन अब तो आना होगा

अपना रूप दिखाना होगा

हाथ धनुष तो लाना होगा

उपदेश तुम्हें तो देना होगा