Sunday, August 8, 2010

सच की ताकत

हाँ सही पढ़ा आपने
सच बहुत ताकतवर
होता है |
पर इस सच को कह पाना
इस सच को सह पाना
इस सच को जी पाना
बेहद त्रासद अनुभव
हुआ करता है |
बेपेंदे के लोटे से स्वार्थी जन
जहां मतलब निकलता हो
जहां उनकी दाल् गलती हो
हवा के रुख से
बदलते हैं अपनी निष्ठाएं |
सच नितांत अकेला और
निरावरण हुआ करता है
सच आपके साहस की
हर पल परीक्षा लेता है|
कई बार तो सारे के सारे झूठ
अपने पूरे प्रलोभनों के साथ
आपको खींचने की पूरी
कोशिश शिद्दत से करते हैं|
इनसे बचने की झमेले में
हो जाते हैं लहूलुहान आप
ये सारे के सारे झूठे वजूद
आपको बुरी तरह तोड़ते है |
और फिर भी आप
नहीं छोड़ पाते सच का साथ
तब होता है सच विजयी
अपनी पूरी ताकत के साथ |
और आप अनायास कह उठट्रे हैं
सच में ताकत
सच की ताकत
हमें जीना सिखाती है
बार-बार हरबार |

5 comments:

  1. सच में ताकत
    सच की ताकत
    हमें जीना सिखाती है
    बार-बार हरबार |

    सच है !!

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  2. शानदार सोच ,सार्थक और सराहनीय प्रस्तुती ...

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  3. अच्छी रचना ,बधाई

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  4. शानदार सोच ,सार्थक और सराहनीय प्रस्तुती ...

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  5. सच नितांत अकेला और
    निरावरण हुआ करता है
    सच आपके साहस की
    हर पल परीक्षा लेता है|
    बिलकुल सच कहा है आपने ! और हर पल हमें इस परीक्षा में खरा उतरने के लिये लहूलुहान होना पडता है लेकिन फिर भी हम सत्य से विमुख नहीं होते क्योंकि ,

    सच की ताकत
    हमें जीना सिखाती है
    बार-बार हरबार |

    बहुत खूब ! बहुत सुन्दर प्रस्तुति बीनाजी ! बहुत बहुत बधाई !

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